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धर्म एवं दर्शन >> हनुमान बाहुक

हनुमान बाहुक

गोस्वामी तुलसीदास

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2016
पृष्ठ :51
मुखपृष्ठ : ईपुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 9697

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सभी कष्टों की पीड़ा से निवारण का मूल मंत्र


हनुमानबाहुक


आरती श्रीजानकीनाथ जी की

जय  जानकिनाथा,  जय  श्री  रघुनाथा ।
दोउ कर जोरे बिनवौं प्रभु मेरी सुनो बाता।।
जय जानकि...

तुम रघुनाथ हमारे  प्रान, पिता-माता ।
तुम ही सज्जन-संगी भक्ति-मुक्ति-दाता।।
जय जानकि...

लख   चौरासी   काटो   मेटो  यम-त्रासा।
निसिदिन प्रभु मोहि राखो अपने ही पासा।।
जय जानकि...

राम भरत  लछिमन  सँग  शत्रुहन भैया ।
जगमग ज्योति विराजै, सोभा अति लहिया।।
जय जानकि...

हनुमत नाद बजावत, नेवर झमकाता ।
स्वर्णथाल कर आरती कौसल्या माता।।
जय जानकि...

सुभग मुकुट सिर, धनु कर सोभा भारी।
मनीराम दर्शन करि पल-पल बलिहारी।।
जय जानकि...

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